
Nemi Chand Mawari "Nimay" is an Indian Poet, Writer and a Chemist. He has been published three poetry books namely "Kavya ke fool-2013", "Anuragini-Ek premkavya-2020" and an anthology book "Svapnmanjari-2020". One book "Kohare ki Aagoshi me" based on social issues, humanity, life and relations is also published in April-2021. He got so many awards in the field of writing. To be a man, you have to understand the meaning of man. This is the mendatory task for all person in the world.
सोमवार, 19 नवंबर 2018
Definition of building
निर्माण::::---
___________
तिनके -तिनके को जोड़
इक प्यारा घर बनता है ,
तभी तो इस जहान में
प्यार का चमन खिलता है ।
अनन्तिम होती है उमंग ,
चाहे अन्तिम लगे हर घड़ी ।
अकल्पनीय हौंसला लिए ,
झंझावातों के बीच भी ,
एक छोटी बुलबुल
नहीं टूटने देती
अपनी हिम्मत ।
फिर एक सक्षम ,समर्थ
समझ से पूर्ण
मानव ,
छोटी सी चिन्ता में ही
टूट जाता है
लाचार बन ।
अभी तो मुहुरत निकला है ,
सावन के शुभ आगमन का ।
विस्तारित होगा इनका
आलय ,
श्यामवर्णी अम्बर तले ।
प्रसार होगा इन
नन्हें पखेरुओं के
बुलंद स्वप्नों का ,
और बढ़ता जाऐगा
हौंसला बुलबुल का ।
क्योंकि किसी से सुना था कि ,
उम्मीद पर दुनिया कायम है ।
मगर उम्मीद तो तब होगी ,
जब हौंसला कायम होगा ।
नेमीचंद मावरी
सदस्य, हिन्दी साहित्य समिति, बूंदी (राज.)
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तिनके -तिनके को जोड़
इक प्यारा घर बनता है ,
तभी तो इस जहान में
प्यार का चमन खिलता है ।
अनन्तिम होती है उमंग ,
चाहे अन्तिम लगे हर घड़ी ।
अकल्पनीय हौंसला लिए ,
झंझावातों के बीच भी ,
एक छोटी बुलबुल
नहीं टूटने देती
अपनी हिम्मत ।
फिर एक सक्षम ,समर्थ
समझ से पूर्ण
मानव ,
छोटी सी चिन्ता में ही
टूट जाता है
लाचार बन ।
अभी तो मुहुरत निकला है ,
सावन के शुभ आगमन का ।
विस्तारित होगा इनका
आलय ,
श्यामवर्णी अम्बर तले ।
प्रसार होगा इन
नन्हें पखेरुओं के
बुलंद स्वप्नों का ,
और बढ़ता जाऐगा
हौंसला बुलबुल का ।
क्योंकि किसी से सुना था कि ,
उम्मीद पर दुनिया कायम है ।
मगर उम्मीद तो तब होगी ,
जब हौंसला कायम होगा ।
नेमीचंद मावरी
सदस्य, हिन्दी साहित्य समिति, बूंदी (राज.)

A poem "Intuition"
----KEEP IN MIND-(Intuition)---
Run, run, run
Unless you achieve your goal
But keep in mind that your attention is
not going on the thorns of the path.
Read, read, read
Until your eyes start responding
Read, read, read
Until your eyes start responding
But keep in mind that there is no blindness
of competing with the opponent.
Write, write, write
Unless people begin to take pride in writing from your pen
But keep in mind that the writings
are not forgetting their limitations.
Sing, sing, sing
Unless these stars, the sky, the moon,
the stars begin to tease the music for you,
But keep in mind that people
do not understand that you are mad.
Dance, dance, dance
Unless you find this world goal
But keep in mind that this dance
is not your wrong profession.
fight, fight, Fight
As long as the scum of the falsehood
of truth is not started,
But keep in mind that the dirt
is not looking at you either.
Laugh, laugh, laugh
As long as you do not feel childhood,
But keep in mind that somewhere you understand the child,
this time is not taking advantage.
If you are doing this
So think if you are still just optimistic
If you do not live the present
Because the creator only won the current.
And not from living hopes, comes from deeds.
***************************
A poem against human activities in Kerala's tragedy
चुभन भरे शब्दों में भी लगती है मिठास
जब हर शब्द को तौला जाता है
अपने जीवन के उन वक्तव्यों से ,
जिन्हें कभी हमने भी बोला था .
यही तो है शायद विध्वंसता के पीछे का सच.
विकास की दौड़ से मचे इस महाताण्डव में ,
नेपथ्य में नजर आता है ,
तो केवल क्रन्दन और आलाप
जो आज बेघर होते जनमानस का सच है ,
या फिर वो झूठ जिसे सोचे समझे नाट्य की तरह रचा जाता है,
प्रकृति के खिलाफ.
जब तक मिलता है प्रेम हर तरफ से ,
तो समझते है जीत चुके हैं हम ,
मगर एक रंग जब दिखाए कोई अपनी असलियत का
तो कहते है ,दगा है.
चुभते हुए शर छोड़े मगर आगाह करने को ,
शायद ये चेतावनी है .
समझे तो मिठास से कम नहीं.
खतरे को भांप अब आरी को तहस -नहस करना ही होगा.
विडंबना है ,मानव पीछे देख कर आगे बढ़ने को
शर्मिंदगी महसूसता है ,
मगर प्रकृति की खिलाफत में कई केरल तबाह होंगे ,
अंदेशा नही हकीकत है.
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नेमीचंद मावरी ''निमय''
सदस्य,हिंदी साहित्य समिति ,बूंदी
जब हर शब्द को तौला जाता है
अपने जीवन के उन वक्तव्यों से ,
जिन्हें कभी हमने भी बोला था .
यही तो है शायद विध्वंसता के पीछे का सच.
विकास की दौड़ से मचे इस महाताण्डव में ,
नेपथ्य में नजर आता है ,
तो केवल क्रन्दन और आलाप
जो आज बेघर होते जनमानस का सच है ,
या फिर वो झूठ जिसे सोचे समझे नाट्य की तरह रचा जाता है,
प्रकृति के खिलाफ.
जब तक मिलता है प्रेम हर तरफ से ,
तो समझते है जीत चुके हैं हम ,
मगर एक रंग जब दिखाए कोई अपनी असलियत का
तो कहते है ,दगा है.
चुभते हुए शर छोड़े मगर आगाह करने को ,
शायद ये चेतावनी है .
समझे तो मिठास से कम नहीं.
खतरे को भांप अब आरी को तहस -नहस करना ही होगा.
विडंबना है ,मानव पीछे देख कर आगे बढ़ने को
शर्मिंदगी महसूसता है ,
मगर प्रकृति की खिलाफत में कई केरल तबाह होंगे ,
अंदेशा नही हकीकत है.
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नेमीचंद मावरी ''निमय''
सदस्य,हिंदी साहित्य समिति ,बूंदी
A poem behind the truth
1. @@ कौन हूँ मैं @@@
-------------------------- -----
कौन हूँ मैं?
सच्चाई का प्रतीक ?
मगर मौन हूँ मैं।
अटल विश्वास या अंधविश्वास का,
किसका डेरा है दिल में मेरे
नफरत या प्यार,
बेशक दो ही तो अपने हैं मेरे,
लक्ष्य साधना का एक साधक बनने चला था
अविराम, अनवरत, असीम ,अकल्पनीय
सोच का धनी, और फिर
सोचा माया में भटकते हुए एकलव्य का
द्रोण हूं मैं
अनश्वरता का जनक
कौन हूँ मैं?
परिमित होता नहीं,
सीमाएँ सब लांघ चुका,
परिधि कब की क्षतिग्रस्त हो चुकी है
अब अनंत रेखाएँ भी सारी
असमांतर है या लम्बवत
भान नहीं हो पाता
लगता है विषम परिस्थितियों में निर्मित
कोई त्रिकोण हूँ मैं
निराकार या साकार
कौन हूँ मैं?
🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑
नेमीचंद मावरी (निमय)
शोधार्थी, रसायनशास्त्र
जयपुर
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कौन हूँ मैं?
सच्चाई का प्रतीक ?
मगर मौन हूँ मैं।
अटल विश्वास या अंधविश्वास का,
किसका डेरा है दिल में मेरे
नफरत या प्यार,
बेशक दो ही तो अपने हैं मेरे,
लक्ष्य साधना का एक साधक बनने चला था
अविराम, अनवरत, असीम ,अकल्पनीय
सोच का धनी, और फिर
सोचा माया में भटकते हुए एकलव्य का
द्रोण हूं मैं
अनश्वरता का जनक
कौन हूँ मैं?
परिमित होता नहीं,
सीमाएँ सब लांघ चुका,
परिधि कब की क्षतिग्रस्त हो चुकी है
अब अनंत रेखाएँ भी सारी
असमांतर है या लम्बवत
भान नहीं हो पाता
लगता है विषम परिस्थितियों में निर्मित
कोई त्रिकोण हूँ मैं
निराकार या साकार
कौन हूँ मैं?
🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑
नेमीचंद मावरी (निमय)
शोधार्थी, रसायनशास्त्र
जयपुर
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